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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

चंडीगढ़ से 10वीं, 11वीं और 12वीं करने वाला ही होगा एमबीबीएस में एलिजिबल

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  • एमबीबीएस की काउंसिलिंग पर रोक, हाईकोर्ट ने बदला एडमिशन क्राइटेरिया

Dainik Bhaskar

Jul 05, 2019, 08:37 AM IST

चंडीगढ़. शहर में एमबीबीएस की सीटों पर चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को प्रेफरेंस मिलेगी। इसको लेकर वीरवार को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। जस्टिस दया चौधरी और जस्टिस सुधीर मित्तल की खंडपीठ ने अपने फैसले में काउंसिलिंग पर रोक लगाते हुए एडमिशन क्राइटेरिया को ही बदल दिया है। अब नए क्राइटेरिया के तहत वह स्टूडेंट्स एडमिशन के लिए एलिजिबल होंगे, जिन्होंने 10वीं, 11वीं और 12वीं चंडीगढ़ से की है। इस मामले को लेकर शहर के कुछ पेरेंट्स ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जीएमसीएच में 150 सीटें हैं, जिन पर करीब 1200 स्टूडेंट्स ने अप्लाई किया था।

डबल बेनिफिट ले जाते स्टूडेंट्स: पंजाब, हरियाणा, हिमाचल व कुछ अन्य राज्यों के स्टूडेंट्स चंडीगढ़ में इसलिए 11वीं और 12वीं करते हैं, क्योंकि उनको डबल बेनिफिट मिलता है। अगर वे पंजाब के रेजिडेंट हैं तो पंजाब में एमबीबीएस की सीटों पर एडमिशन के लिए अप्लाई करते हैं, क्योंकि अपने राज्य का डोमिसाइल उनके पास है। इसके आधार पर पंजाब में एडमिशन के लिए अप्लाई किया और चंडीगढ़ के किसी स्कूल से 11वीं, 12वीं में एडमिशन लेकर चंडीगढ़ में भी एलिजिबल हो गए। ऐसे में एक स्टूडेंट को डबल बेनिफिट हो गया। स्टूडेंट की पहली प्रेफरेंस चंडीगढ़ की होती है।

अपनी मांग जीएमसीएच के डायरेक्टर प्रिंसिपल को सौंपने के :
बाद जब पेरेंट्स को यह दिखा कि कोई कार्रवाई नहीं हो रही तो उन्होंने काउंसिलिंग के दौरान हंगामा कर दिया। हंगामा कर रहे पेरेंट्स का कहना था कि जिन्होंने झूठा एफिडेविट दे दिया, उन्हें एडमिशन के लिए एलिजिबल क्यों किया जा रहा है। जीएमसीएच ने फिलहाल झूठे एफिडेविट के मामले पर कोई एक्शन नहीं लिया लेकिन मामले पर लीगल एडवाइस ली जाएगी।

30 पेरेंट्स ने दिए झूठे एफिडेविट, अब होगी कार्रवाई : जीएमसीएच में एडमिशन लेने का क्राइटेरिया था कि पेरेंट्स को एक एफिडेविट देना है कि उन्होंेने रेजिडेंस के आधार पर एडमिशन के लिए किसी अन्य राज्य में अप्लाई नहीं किया है। इस पर 30 पेरेंट्स ऐसे थे जिन्होंेने जीएमसीएच को यह झूठा एफिडेविट दे दिया। इसकी पोल भी कुछ पेरेंट्स ने ही खोली। चंडीगढ़ की तरह ही अन्य राज्यों में भी एमबीबीएस की एडमिशन का प्रोसेस चल रहा है। ऐसे में पेरेंट्स ने वीरवार को जीएमसीएच के डायरेक्टर प्रिंसिपल डॉ. बीएस चवन को 30 स्टूडेंट्स की एक लिस्ट व एक मेमोरेंडम सौंपा। बताया गया कि जीएमसीएच ने जिन स्टूडेंट्स को एडमिशन के लिए एलिजिबल किया है, उनमें से 30 स्टूडेंट्स ने अन्य राज्यों में भी एडमिशन के लिए अप्लाई किया है। इसका मतलब यह है कि 30 पेरेंट्स ने झूठा एफिडेविट जीएमसीएच को दिया है, इसलिए उनकी एलिजिबिलिटी को कैंसिल कर दिया जाए।

सवाल था कि एडमिशन में सिर्फ 12वीं ही क्यों :  गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर 32 ने एडमिशन के लिए तीन क्राइटेरिया अपनाए थे। इनमें से एक क्राइटेरिया एजुकेशन के आधार पर जबकि बाकी के दो क्राइटेरिया रेजिडेंस के आधार पर था। पेरेंट्स ने हाईकोर्ट को अपनी याचिका में कहा था कि जीएमसीएच ने अपने क्राइटेरिया में उस स्टूडेंट को एलिजिबल माना है जिसने 12वीं चंडीगढ़ से की होगी। इससे चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स का हक पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व कुछ अन्य राज्यों के स्टूडेंट्स ले जाते हैं। वह इसलिए क्योंकि 10वीं तक ऐसे स्टूडेंट अपने मूल राज्य में पढ़ाई करते हैं लेकिन 11वीं में चंडीगढ़ में एडमिशन ले लेते हैं। 11वीं और 12वीं चंडीगढ़ से करते हैं ताकि वह चंडीगढ़ में एडमिशन के लिए एलिजिबल हो जाएं। ऐसे में चंडीगढ़ के पेरेंट्स चाहते थे कि वह स्टूडेंट एलिजिबल होना चाहिए जिसने 10वीं, 11वीं और 12वीं चंडीगढ़ के किसी स्कूल से की हो।