डीगढ़, 24 July. राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच, पंचकुला, हरियाणा इकाई की ओर से दिनांक 24/7/2021 को सुबह 10.00 बजे से ऑनलाईन मासिक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच, गुजरात के अध्यक्ष डॉ प्रणव भारती जी उपस्थित रहे। मंच संचालन व गोष्ठी की अध्यक्षता, हरियाणा इकाई के सरंक्षक श्री गणेश दत्त बजाज जी ने की ।
गोष्ठी की शुरूआत में गणेश दत्त जी ने गणेश वंदना व सरस्वती वंदना गा कर व सभी अतिथियों का हार्दिक स्वागत करते हुए किया।
मुख्य अतिथि डॉ प्रणव भारती जी ने अपने संबोधन में सभी विद्वतजन, विदूषियों का हार्दिक स्वागत किया। मंच पर सहभागिता पर अपनी प्रसन्नता को वयक्त किया। उसके बाद हरियाणा इकाई के सरंक्षक वैज्ञानिक व कवि श्री गणेश दत्त जी ने मंच को संबोधित किया और साहित्य, कवि गोष्ठियों की बढ़ती परंपरा पर प्रसन्नता दर्शाई।
तत्पश्चात कवि गोष्ठी की शुरूआत हुई। गोष्ठी में नीलम त्रिखा जी, मोहिनी सचदेवा जी, चंद्रकला जैन जी, आभा मुकेश साहनी जी, विजय सचदेव जी, डॉ विमल कालिया जी, नलिनी उप्पल जी, प्रज्ञा शारदा जी, नीरू मित्तल जी, सुदेश मुदगिल नूर जी, अचला डिंगले जी, एस एल धवन जी, सुनीता नैन जी, प्रतिभा माही जी, इन्द्र वर्षा जी, बी के गुप्ता जी, रेणु अब्बी रेणु जी, उषा गर्ग जी, गणेश दत्त जी ने सुमधुर स्वर में, अलग अलग विषयों पर कविताएं, गीत, गजलें सुनाईं। बहुत ही सार्थक गोष्ठी का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित श्री मति प्रणव भारती जी ने अध्यक्षीय सम्बोधन के बाद सार्थक कविता पाठ किया। अन्त में हरियाणा इकाई के सरंक्षक कवि श्री गणेश दत्त ने सभी आदरणीयों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया ।
डॉ० प्रतिभा ‘माही’ शिवपिया जी ने सावन में अपने साजन को याद करते हुए कहा…
तुमसे मिलकर बिछुड़ना गँवारा नहीं, ये भी सच है कि कोई हमारा नहीं
आभा मुकेश साहनी जी ने प्रभु का आवाहन किया…
रो -रो के प्रभु तुम्हें पुकारूँ, सूनी अखियाँ पंथ निहारूँ , आयी है विपदा अति भारी , तुम राखो प्रभु लाज हमारी
रेणु अब्बी ‘रेणू’ जी ने कहा-मेरे मीत, मुझे मीत कहो..क्योंकि..
कृष्ण राधा के मीत हैं, जाने यह जग सारा हम दोनों के प्रेम को जान सका कौन भला
अचला डिंगले जी ने प्रकृति के विषय मे अपने भाव प्रकट किये….
प्रकृति की छटा हो गई निराली, मानो प्रदूषण धोने आई बरखा प्यारी
मोहनी सचदेवा जी ने दोस्तों के विषय मे कहा …
बचपन में खिलोने, जवानी में मोहब्बत और बढ़ती उम्र में दोस्तों का संग, हर उम्र में बदल जाते है दोस्ती के रंग और ढंग
सुदेश मोदगिल नूर जी ने प्रथम गुरु के विषय मे बताया…
प्रथम गुरू है माता और फिर पिता का होता स्थान, शीश झुकाओ दोनों को और दो उनको सम्मान”
नीरू मित्तल ‘नीर’ जी ने ज़िन्दगी पर अपने विचार रखे….
एक पल में सिमट गया सदियों का सफर, इतनी तेज ज़िंदगी की रफ्तार क्यूं है
चंद्रकला जैन जी ने टूटते परिवारों का रहस्य बताया….
आनंद की तलाश खत्म हुई, सुख की मृगतृष्णा के पीछे भाग रहा अतृप्त मन,’मैं, मैं’ के शोर में ‘हम’ की सुगबुगाहट खो गई.
नीलम त्रिखा जी ने प्रकृति का वर्णन अपने शब्दों में किया…
कही है सुंदर पर्वत, नदिया कहीं फूलों की क्यार लिखूं, तू ही बता है मात मेरी मैं कैसे तेरा श्रृंगार लिखूं
कमल धवन जी ने मानव के विषय मे कहा…..
तूने मनुज को दुनिया में क्या क्या दिया नहीं, वो क्या किसी का होगा जो तेरा हुआ नहीं
बाल कृष्ण गुप्ता जी ने बाजार की बात की…….
कहीं पर अपनों का बाजा़र, भी लगता तो होगा , जहाँ हम मन पसंद अपनों को, अपनी रुचिनुसार अपनों को ले लें
नलिनी उप्पल जी ने किरदार के बदलते स्वरूप को दर्शाया….
कहानियाँ वही रहती हैं, किरदार बदल जाते हैं….
इंद्र वर्षा जी ने ताज़महल पर मुद्दा उठाते हुए कहा….
मैंने कब कहा, मुझे ताजमहल बनवा दो
डॉ विमल कालिया ‘विमल’ जी ने माँ पर अपनी कविता कही…
टुकड़े-टूकड़े यादों के, जोड़-जोड़, एक माँ बनाता हूं
उषा गर्ग ने बलिदान के बारे में कहा………
क्या हमें याद है ब्रह्मांड का सबसे बड़ा बलिदान, मानवता की रक्षा के लिए, ऋषि दधीचि ने किया, हड्डियों का दान
विजय सचदेव जी को कविता
उम्र को ना देख तू देख तू बहार को, खुशी-खुशी पहन ले खुशियों के हार को
गणेश दत्त जी की कविता
वक्त आने पर, धरा से, साथ कुछ न जाएगा, इस धरा का, इस धरा पर, सब धरा रह जाएगा।
अंत में गोष्ठी की अध्यक्षा श्री मति प्रणव भारती जी ने कविता पढ़ी
हमने तो अपने गजरों में कितने-कितने अहं पिरोए, हमने तो अपने सपनों में कितने-कितने सपन सँजोए।
पर कुछ अपने काम न आया, हमने कितना धोखा खाया।
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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020



















