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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

नेहरूजी के बेहद खास थे पृथ्वीराज कपूर, राज्यसभा सांसद बन गए थे संसद

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Dainik Bhaskar

May 27, 2019, 09:31 AM IST

बॉलीवुड डेस्क.   स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर नेहरू को गुजरे 55 साल हो गए हैं। उनका निधन 27 मई 1964 को हुआ था। पंडितजी की फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी कई यादें हैं। खासकर हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रहे पृथ्वीराज कपूर उनके काफी करीबी माने जाते थे। कपूर संसद में कदम रखने वाले  (राज्यसभा के लिए मनोनीत सदस्य के रूप में) पहले बॉलीवुड स्टार थे। वो न केवल कट्टर कांग्रेसी थे, बल्कि नेहरूजी के विश्वासपात्र भी थे। खास बात यह है कि अपने सपोर्टर होने के बावजूद नेहरूजी ने कभी कपूर को स्वतंत्रता नायक नेताजी सुभाषचंद्र बोस की तारीफ करने से नहीं रोका। पृथ्वीराज ने नेताजी की इंडियन नेशनल आर्मी के लिए फंड भी इकठ्ठा किया था। 

नेहरूजी को मना भी कर देते थे कपूर

  1. राशिद किदवई की किताब नेता-अभिनेता : बॉलीवुड स्टार पावर इन इंडियन पॉलिटिक्स के मुताबिक, कई बार ऐसा भी होता था कि पृथ्वीराज कपूर नेहरूजी को इनकार करने में भी नहीं सकुचाते थे। मसलन, एक बार पंडितजी उनसे मिलना चाहते थे। उन्होंने एक अधिकारी को पृथ्वीराज कपूर को डिनर पर लाने के लिए भेजा। लेकिन कपूर ने यह कहकर आने से इनकार कर दिया कि वो अपनी थिएटर टीम के साथ हैं। चूंकि नेहरूजी खुद भी स्टेज और फिल्मों के शौकीन थे, इसलिए उन्होंने कपूर और उनकी थिएटर टीम को अगले दिन के लिए आमंत्रित कर लिया। 60 लोगों का पूरा ग्रुप, (जिसमें एक्टर्स, संगीतकार और स्टेज बनाने वाले कारपेंटर्स भी शामिल थे) नई दिल्ली के तीन मूर्ती भवन स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचा और नेहरूजी के प्राइवेट डाइनिंग रूम में डिनर किया। नेहरूजी ने खुद उन्हें पूरा आवास घुमाया और म्यूजियम के साथ-साथ वो गिफ्ट्स भी दिखाए, जो उन्हें गणमान्य लोगों से मिले थे। 

  2. नेहरूजी कहते थे- तुम साथ होते हो तो हिम्मत मिलती है

    किताब नेता-अभिनेता… में बिना नाम लिए पृथ्वीराज कपूर की कजिन के हवाले से लिखा है कि नेहरूजी के साथ उनकी खास बॉन्डिंग थी। कजिन के मुताबिक, “मैंने चुपके से नेहरूजी को पापाजी (पृथ्वीराज कपूर) से यह कहते थे सुना था कि जब तुम मेरे साथ चलते हो तो मुझे एक तरह की हिम्मत देते हो।”

  3. जब कपूर ठुकराया विदेशी टूर का ऑफर

    एक्ट्रेस जोहरा सहगल ने अपनी बुक ‘स्टेजेस : दि आर्ट अंद एडवेंचर्स ऑफ जोहरा सहगल’ में लिखा है कि नेहरूजी अक्सर कपूर से विदेशों में जाने वाले सांस्कृतिक प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व करने को कहते थे। इसके मुताबिक, “एक बार टूर काफी नजदीक था, इसलिए कपूर ने नेहरूजी की रिक्वेस्ट मानने से इनकार कर दिया। कहा जाता है कि इस पर नेहरूजी उन्हें अपनी भूमिका न समझने के लिए फटकार लगाई। कपूर ने कहा, ‘मुझे पता है कि कोई और भी है, जो नहीं समझ रहा है।’ जब पंडितजी ने पूछा- कौन? तो कपूर ने जवाब दिया- आप।”

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