चंडीगढ़,सुनीता शास्त्री। आने वाला समय आयुर्वेदिक चिकित्सा का है व जिस प्रकार लोग एलोपैथिक चिकित्सकों से अपॉइंटमेंट लेकर इलाज करवाते हैं, वोही स्थिति आयुर्वेदाचार्यों के साथ भी पेश आने वाली है। आयुर्वेदिक चिकित्सा डिजाइनर सिस्टेमेटिक ट्रीटमेंट है जबकि एलोपैथिक रेडीमेड उपचार है । यह बात सोसाइटी के महासचिव डॉ. नरेश मित्तल ने पत्रकारो से बात चीत करते हुए कही । कॉलेज के स्वस्थरक्षण एवं योग विभाग के प्रमुख प्रो.(डॉ.) डीके चड्ढा ने बताया कि इस सेमिनार के सफल आयोजन से ये संस्थान में लाइफ़स्टाइल डिसऑर्डर्स पर काम करने हेतु एक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में उभरेगा व एक मील का पत्थर साबित होगा। श्री धन्वंतरी एजुकेशनल सोसायटी द्वारा श्री धन्वंतरी आयुर्वेदिक कॉलेज, से. 46 में आज चैलेंजेज एंड स्ट्रैंग्थ ऑफआयुष फॉर द प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफलाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स विषय को लेकर एक राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया जिसमें सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश (से.नि.) जस्टिस अशोक बहन मुख्य अतिथि के तौर पर पधारे। सेमिनार में डॉक्टर जेएलएन शास्त्री, डॉ सुश्री तनुजा नेसारी, डॉक्टर दीपिका गंजू गुणावत एवं डॉ. बी.टी. चिंदानामूर्ति कीनोट स्पीकर थे। उन्होंने बताया कि इस मौके पर जीआरएयू, होशियारपुर के उपकुलपति प्रो. डॉ. बीके कौशिक, आयुष पंजाब के निदेशक डॉ राकेश शर्मा, आयुष हरियाणा के निदेशक डॉ. एसएस बाहनमनी, जीआरएयू के रजिस्ट्रार एवं सीसीआईएम एग्जीक्यूटिव डॉ. संजीव गोयल, सीसीआईएम के सदस्य व जाने-माने चिकित्सक वैद्य जगजीत सिंह, सीसीआईएम सदस्य डॉ. अनिल भारद्वाज, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ. दिलीप मिश्रा, डॉ. विकास गिल व डॉ. धर्मेंद्र विशिष्ट के साथ-साथ पंजाब एवं हरियाणा के सभी आयुष महाविद्यालयों के प्रमुख अधिकारीयों ने भी इसमें शिरकत की। इस मौके पर आयुर्वेद की सेवा करने वाले चिकित्सकों को उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित भी किया गया। इसके साथ ही 1979 व 1980 के बैच की एलुमनी मीट भी रखी गयी थी।उन्होंने कॉलेज के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ये आयुर्वेदिक कॉलेज उन चंद ऐसे संस्थानों में से एक है जिसके साथ अस्पताल भी जुड़ा है। हॉस्पिटल सीजीएचएस के एप्रूव्ड पैनल में है तथा एनएबीएच एक्रीडिटेशन भी है। इसके अलावा एनएएसी की एक्रीडिटेशन प्राप्त करने हेतु प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि कॉलेज में चार मंजिला नया ब्लॉक निर्माणाधीन है । इसके बनने के बाद यूजीसी की रिक्वायरमेंट पूरी हो जाएगी तथा नए सत्र से यहां पीजी कोर्स व अन्य पाठ्यक्रम भी यहां पढाये जा सकेंगे।




















