सड़क हो या घर, फ्री में फर्स्ट एड देने पहुंचेगी ‘रेस्पोंडर बाइक’

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चंडीगढ़.एंबुलेंस ट्रैफिक जाम में फंस जाने के कारण कई बार जरूरतमंदों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। यह प्रॉब्लम दूर करने और पेशेंट को इलाज देने के लिए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल मोहाली ने 24×7 ‘इमरजेंसी मेडिकल एंड ट्रॉमा केयर सर्विसेज’ की शुरुआत की है।

‘रेस्पोंडर बाइक्स’ के नाम से यह सर्विस शुरू की गई है। अभी यह सुविधा मोहाली और चंडीगढ़ के लिए शुरू की गई है। मैक्स हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. रमेश सेन ने बताया कि पंचकूला में हरियाणा सरकार ने अभी इसकी इजाजत नहीं दी है।

}यह करना होगा :
{ इमरजेंसी नंबर 77107-77107 पर फोन करना होगा। ट्रेंड पैरामेडिकल स्टाफ बाइक से निकलेगा। पीछे-पीछे एक एंबुलेंस भी चलेगी।
{ अगर रास्ते में एंबुलेंस जाम में फंसी तो बाइक पर निकला पैरामेडिकल स्टाफ पेशेंट को इलाज देना शुरू कर देगा। तब तक एंबुलेंस भी मौके पर पहुंच जाएगी।
{ मरीज से रेस्पोंडर बाइक और उस पर सवार पैरा मेडिकल स्टाफ द्वारा किए इलाज का
कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा।
{ फर्स्ट एड के बाद जरूरत पड़ने पर मरीज को एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया जाएगा। उससे एंबुलेंस का खर्च लिया जाएगा। अगर पेशेंट कहेगा कि उसे मैक्स हॉस्पिटल में इलाज कराना है, तभी उसे वहां रखा जाएगा। अगर वह कहेगा कि सरकारी हॉस्पिटल में जाना है तो उसे वहां भेज दिया जाएगा।

}यह सुविधाएं रेस्पोंडर बाइक पर :
{ डी-फेब्रीलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, ग्लूकोमीटर, ग्लूकोज ड्रिप, बीपी इंस्टूमेंट, कुछ जरूरी इंजेक्शन व दवाइयां।
{ पैरा मेडिकल स्टाफ को ट्रेनिंग दी गई है। मरीज को क्या इलाज दिया जाना चाहिए, वह देखकर संबंधित डॉक्टर से बात लेकर तुरंत इलाज देगा।
{ सड़क हादसों के शिकार मरीजों के लिए फायदेमंद।

}दिल्ली में चल रही है यह सर्विस :
दिल्ली में मैक्स की रेस्पोंडर बाइक्स चल रही हैं। यहां पर अभी दो बाइक्स शुरू की गई हैं। 2-3 महीने में 3-4 रेस्पोंडर बाइक्स और यहां शुरू की जाएंगी।

}40% हार्ट पेशेंट्स की घर में ही हो जाती है मौत… हार्ट अटैक से सबसे ज्यादा मौतें भारत में ही होती हैं। इसका कारण समय पर इलाज न मिलना है। रेस्पोंडर बाइक का फायदा यह होगा कि जैसे ही टोल फ्री नंबर से कॉल आएगी तो बाइक मौके पर तुरंत पहुंचेगी। पैरा मेडिकल स्टाफ मरीज की स्थिति देख कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह पर मरीज का ट्रीटमेंट शुरू कर देगा। समय पर इलाज मिलने से उसे बचाने में मदद मिलेगी। पीछे आ रही एंबुलेंस में मौजूद इक्विपमेंट की मदद से मरीज को स्टेबल कर हॉस्पिटल तक लाया जा सकेगा।

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