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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

स्वदेशी राष्ट्रीय गोधन शिखर सम्मेलन 2025 नई दिल्ली में हुआ प्रारंभ, छह दिवसीय गौ-आधारित सतत विकास आंदोलन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल

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स्वदेशी राष्ट्रीय गोधन शिखर सम्मेलन 2025 नई दिल्ली में हुआ प्रारंभ, छह दिवसीय गौ-आधारित सतत विकास आंदोलन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल

नई दिल्ली. बुधवार, 05 नवम्बर 2025: राष्ट्रीय गोधन महासंघ द्वारा आयोजित स्वदेशी राष्ट्रीय गोधन शिखर सम्मेलन 2025 का शुभारंभ आज नई दिल्ली के इंडिया गेट सर्किल स्थित मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में हुआ। यह छह दिवसीय शिखर सम्मेलन 5 से 10 नवम्बर 2025 तक आयोजित किया जाएगा और इसका प्रमुख विषय है “बायो ई3 पॉलिसी के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत पर्यावरण अर्थव्यवस्था और रोजगार।”

सम्मेलन स्थल पर 600 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें पंचगव्य उत्पाद, जैविक खेती के समाधान, हरित ऊर्जा नवाचार और पर्यावरण अनुकूल तकनीकें प्रदर्शित की जा रही हैं। हैं। यह शिखर सम्मेलन उद्यमियों, किसानों और पर्यावरणविदों के लिए एक सशक्त मंच प्रदान कर रहा है. जहाँ गौधन आधारित अर्थव्यवस्था के नए अवसरों पर विचार विमर्श किया जा रहा है।

आज प्रातः इसका उ‌द्घाटन श्री आलोक कुमार जी (अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिंदू परिषद), श्री नायब सिंह सैनी (मुख्यमंत्री, हरियाणा), श्री संतोष तनेजा जी (संस्थापक, संकल्प) और सुश्री बंसुरी स्वराज जी (सांसद) की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। उद्घाटन दिवस का आरंभ प्रातः 9:00 बजे हवन से हुआ, जिसके पश्चात 11:00 से 12:30 बजे तक संबोधन – मंच कार्यक्रम आयोजित हुआ और इसके बाद 12:30 बजे लंगर प्रसाद के साथ प्रथम दिवस का समापन हुआ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय गोधन महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक श्री विजय खुराना ने कहा, “बायो ई पॉलिसी के माध्यम से हमारा लक्ष्य पर्यावरण अर्थव्यवस्था और रोजगार के बीच एक सतत संतुलन स्थापित करना है। गौशालाएं अब केवल गायों की सेवा तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे ग्रामीण सशक्तिकरण की रीढ़ बन चुकी हैं जो रोजगार सृजन हरित नवाचार और भारत की आत्मनिर्भर यात्रा को आगे बढ़ा रही हैं।” उन्होंने बताया कि देशभर की गौशालाओं के माध्यम से 20 लाख से अधिक रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। वर्ष 2006 में जहां 9,500 गौशालाएं थीं. वहीं अब यह संख्या 2024 में बढ़कर 22,000 से अधिक हो चुकी है. जो गौ-आधारित उद्यमिता के निरंतर विस्तार को दर्शाती है।

राष्ट्रीय गोधन शिखर सम्मेलन 2025 की संयोजिका श्रीमती सुनीता दुग्गल ने कहा, “प्रत्येक गौशाला में आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बनने की क्षमता है जो आय सृजन जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने और आजीविका व पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने में सक्षम है। बायो ई ढांचा भारत को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करता है।”

वर्षों से राष्ट्रीय गोधन महासंघ वैज्ञानिक, आर्थिक और पारिस्थितिक दृष्टि से गायों के महत्व को जन-जन तक पहुँचाने में अग्रणी रहा है। महासंघ की सतत पहलों के परिणामस्वरूप देश में गायों की संख्या 9.5 करोड़ से बढ़कर 22 करोड़ तक पहुँच चुकी है, जिससे गौधन भारत के ग्रामीण विकास और सतत अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बन गया है।

10 नवम्बर 2025 तक प्रतिदिन आयोजित होने वाले सत्रों, पैनल चर्चाओं और प्रदर्शनियों के साथ, स्वदेशी राष्ट्रीय गोधन शिखर सम्मेलन 2025 भारत की पारंपरिक ज्ञान-संपदा को आधुनिक सतत विकास लक्ष्यों से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है जो ग्रामीण उद्यमिता, हरित नवाचार और आर्थिक आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करती है. तथा यह कार्यक्रम श्री विजय खुराना की अध्यक्षता में आयोजित हो रहा है।