भक्ति तन में नहीं मन में धारण करनी चाहिए : स्वामी आत्मानंद

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श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन सिद्ध बाबा स्वामी स्वत प्रकाश पुरी जी महाराज की 64 वीं पुण्यतिथि शिव शक्ति योग मिशन द्वारा स्थानीय शिवाला मंदिर में श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ जारी है। चौथे दिन श्री श्री 1008 आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी आत्मानंद पुरी महाराज ने कहा कि भक्ति जो परम प्रेम का स्वरूप है भगवान के प्रति अपार श्रद्धा निष्काम भावना भक्तों के मन में रहती है। भक्ति तन में नहीं मन में धारण करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली भक्ति है किसी संत का संग करना सबसे पहले व्यक्ति को अच्छे संग की जरूरत होती है स्वामी जी ने कहा कि संसार में चर्चा और सत्संग में अमृत वर्षा होती है संसार की चर्चा व्यक्ति को दुख देती है और भगवद रूपी अमृत वर्षा से शांति प्राप्त होती है कथा के दौरान श्री कृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। आतिशबाजी भी की गई। इस मौके पर स्वामी गिरिधर गोपाल पुरी हरिद्वार वाले, स्वामी दिव्य आत्मानंद जी सरस्वती बद्रीनाथ वाले, स्वामी उमा पुरी, मास्टर गुरप्रीत सिंह जज, सर्वजीत कौर प्रधान नगर कौंसिल जीरा, पंडित कृष्णानंद, मैनेजर ओम प्रकाश पुरी, जोगेंद्र पाल सुपरिटेंडेंट एसडीएम कोर्ट, करण अग्रवाल, बलवंत चौधरी, गुलशन शर्मा, किरण गौड़, विनीता, नीना अग्रवाल, सुदेश शर्मा आदि के अलावा फिरोजपुर, जलालाबाद, श्रीगंगानगर, बठिंडा, पीलीबंगा, पानीपत, लुधियाना से भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।

कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी।

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Zira – bhakti should not be kept in mind swami atmanand