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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

पंजाब में मसालेदार, ऑइली खाना दे रहे किडनी स्टोन को बढ़ावा:डॉ संजीव

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चंडीगढ़, सुनीता शास्त्री। लुधियाना उत्तर भारत व पंजाब में विशेष रूप से उपयोग किए जाने वाले मसालेदार और ऑइली खाने के कारण हर 100 में से 15 लोग 40 वर्ष की आयु के बाद किडनी स्टोन का शिकार हो रहें हैं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत के लिए सर्जरी की आवश्यकता होती है। गुरुवार को यहां आस्था अस्पताल में डॉ संजीव के गुप्ता चीफ़ यूरोलॉजिस्ट व किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि गुर्दे की पथरी का पता चलने पर लोग सभी तरह के अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गुर्दे पूरी तरह से खराब होने का खतरा रहता है। अब जैसे-जैसे विज्ञान विकसित हुआ है, किडनी स्टोन को हटाने की सर्जरी बहुत सरल, कम समय लेने वाली और सुरक्षित हो गई है। हम आज 90 प्रतिशत सर्जरी रेट्रोग्रेड इंट्रैनल सर्जरी (आरआइआरएस) से करते हैं ।आरआइआरएस तकनीक के बारे में बात करते हुए, डॉ संजीव ने कहा कि फाइबर-ऑप्टिक एंडोस्कोप नामक एक देखने वाली नली का उपयोग करके गुर्दे के भीतर सर्जरी करने की एक प्रक्रिया है। दूरबीन द्वारा किडनी के अंदर लचीले यूरेटोस्कोप की मदद से की जाने वाली सर्जरी को रेट्रोग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी कहते हैं। दूरबीन को मूत्र मार्ग से किडनी तक पहुंचाया जाता है। यहां बनने वाली स्टोन को लेजर किरणों से तोड़ा जाता है। आरआइआरएस से किडनी व ग्लैडर की पथरी मूत्र वाहिनी के रास्ते प्राकृतिक ढंग से निकाली जाती है।डॉ संजीव ने बताया कि किडनी से पथरी निकालने के लिए यह तकनीक सबसे आधुनिक, सुरक्षित व कारगर है। आरआइआरएस सर्जरी में लेप्रोस्कोपिक या ओपन सर्जरी की तरह त्वचा पर चीरा नहीं लगाया जाता। लेजर किरणों से स्टोन को तोडऩे के बाद एक बास्केट की मदद से मूत्र मार्ग के द्वारा उसे निकाल दिया जाता है।डॉ संजीव ने बताया कि आमतौर पर यह प्रक्रिया सामान्य या स्पाइनल एनेस्थीसिया के तहत की जाती है।आरआईआरएस के फायदों की बात करते हुए डॉ संजीव ने कहा कि इसमें समस्या का त्वरित समाधान, सर्जरी के बाद लंबे समय तक दर्द का उन्मूलन और एक दिन के अस्पताल के स्टे के साथ- साथ 4 से 6 दिनों के समय में सामान्य गतिविधि पर वापस आना शामिल है।इसके अलावा, चूंकि आरआइआरएस ओपन सर्जरी नहीं है, ऐसा कोई घाव नहीं होता हैं जिसके लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है और संक्रमण की संभावना लगभग शून्य है ।डॉ संजीव ने बताया कि आस्था अस्पताल में बहुत ही वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ नीना गुप्ता कार्यरत हैं। हमारे पास आरआईआरएस करने के लिए सबसे उन्नत तकनीक और उपकरण चिप ऑन टिप लचीला वीडियो यूरेटेरोस्कोप और 100 वाट लेजर तकनीक उपलब्ध है।