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Posted by Surinder Verma on Wednesday, June 17, 2020

चंडीगढ़ में क्षेत्रीय कौशल मंत्रियों का सम्मेलन ‘कौशल मंथन’ सफलतापूर्वक आयोजित

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चंडीगढ़ में क्षेत्रीय कौशल मंत्रियों का सम्मेलन ‘कौशल मंथन’ सफलतापूर्वक आयोजित

आईटीआई उन्नयन और उत्कृष्टता केंद्र युवाओं के लिए नए रोज़गार के अवसर खोलेंगे: श्री जयंत चौधरी

युवाओं की सक्रियता और गतिशील संकल्प भारत को कौशल और नवाचार के एक प्रमुख वैश्विक केंद्र के रूप में बदलने की आधारशिला होंगे: श्री जयंत चौधरी

महिलाओं की भागीदारी भारत की प्रगति और समावेशी विकास की असली ताकत : चौधरी

चंडीगढ़, 28 अगस्त 2025: भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के तत्वावधान में आज चंडीगढ़ में “कौशल मंथन – क्षेत्रीय कौशल मंत्रियों का सम्मेलन” आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय “आईटीआई उन्नयन और राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए राष्ट्रीय योजना” था। माननीय प्रधानमंत्री के कौशल, पुनर्कौशल और अप-स्किलिंग के मंत्र से प्रेरित होकर, यह सम्मेलन माननीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, श्री जयंत चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।

सम्मेलन में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों के कौशल मंत्रियों, सांसदों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया। सम्मेलन में पंजाब , चंडीगढ़, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, बिहार , राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों ने हिस्सा लिया।

इस अवसर पर बोलते हुए, केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री श्री जयंत चौधरी ने कहा, “यह सम्मेलन ‘कौशल भारत मिशन’ को नई दिशा प्रदान करेगा। आईटीआई उन्नयन और उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना युवाओं को उद्योग-उन्मुख आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान करेगी, जिससे उन्हें बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। भारत वैश्विक कौशल अर्थव्यवस्था में भी अग्रणी भूमिका निभाएगा।” उन्होंने आगे बताया कि “2014 में भारत में केवल 600 स्टार्टअप थे, लेकिन 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1.5 लाख से अधिक हो गई है। यह बदलाव दर्शाता है कि भारत की युवा शक्ति और कौशल विकास कार्यक्रम मिलकर देश को नवाचार और उद्यमिता के एक नए युग में आगे ले जा रहे हैं।” श्री चौधरी ने यह भी कहा कि “भारत की आधी आबादी महिलाओं की है और वे अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं। आज देश के कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 40% है। यह भागीदारी भारत की प्रगति और समावेशी विकास की प्रेरक शक्ति है।”

श्री जयंत चौधरी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के युवाओं की अटूट सक्रियता और गतिशील संकल्प, देश को कौशल और नवाचार के एक अग्रणी वैश्विक केंद्र में बदलने की आधारशिला का काम करेगा। उन्होंने आगे रेखांकित किया कि महिलाओं की भागीदारी भारत की प्रगति और समावेशी विकास के पीछे की असली शक्ति है, जो उन्हें सतत और समान विकास की दिशा में देश की यात्रा का केंद्र बनाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि “आईटीआई उन्नयन योजना के लिए धनराशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी, लेकिन राज्यों को इसके कार्यान्वयन में पूर्ण लचीलापन दिया जाएगा। यह एक माँग-आधारित योजना होगी, जिसमें निजी भागीदारों, शैक्षणिक संस्थानों और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, आईटीआई छात्रों को अप्रेंटिसशिप के अवसर प्रदान किए जाएँगे और सरकार उनके लिए वजीफा देगी। इस योजना को क्लस्टर-आधारित तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त किए जा सकें।”
उन्होंने यह भी बताया कि “आईटीआई उन्नयन योजना के तहत 2024 तक लगभग 4.5 लाख सीटें संबद्ध की गई हैं, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और रोज़गार-उन्मुख शिक्षा प्रदान की जा सकेगी।”

इस अवसर पर, श्री चौधरी ने पंजाब सरकार को बधाई दी और कहा कि “पंजाब के आईटीआई संस्थानों में सीटें पूरी तरह भर रही हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है और कौशल विकास के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि को दर्शाता है।” प्रत्येक राज्य की अपनी विशिष्टताएँ हैं, लेकिन संसाधनों के साझा उपयोग, रणनीतियों के समन्वय और उद्योग को समान भागीदार बनाकर ही हम आईटीआई में बदलाव ला सकते हैं, युवाओं को सशक्त बना सकते हैं और एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बना सकते हैं जहाँ कौशल रोज़गार, उद्यमिता और श्रम की गरिमा का मार्ग प्रशस्त करें। कौशल मंथन केवल एक सम्मेलन नहीं है—यह 2047 में विकसित भारत के लिए कौशल विकास को आकर्षक और प्रभावी बनाने हेतु संयुक्त कार्रवाई का आह्वान है।”

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि “कौशल विकास केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि देश के युवाओं की भी ज़िम्मेदारी है। भारत को एक वैश्विक कौशल केंद्र के रूप में स्थापित करने के इस मिशन में युवाओं को सक्रिय रूप से शामिल होना चाहिए।”

अंत में, उन्होंने राज्य प्रतिनिधियों से “अपने विचार खुलकर साझा करने” का आह्वान किया ताकि इस राष्ट्रीय योजना को जमीनी स्तर तक सफलतापूर्वक पहुँचाने के लिए ठोस और व्यावहारिक रणनीतियाँ तैयार की जा सकें।

सम्मेलन में श्री विक्रमजीत सिंह साहनी, माननीय संसद सदस्य (राज्यसभा) और राष्ट्रीय शिक्षुता और खेल, कौशल योजना और उद्यमिता नीति निर्माण के उपाध्यक्ष; श्री कपिल देव अग्रवाल, माननीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास, उत्तर प्रदेश सरकार; श्री मनजिंदर सिंह सिरसा, माननीय कैबिनेट मंत्री, उद्योग, खाद्य और आपूर्ति, और पर्यावरण, वन और वन्यजीव, एनसीटी दिल्ली सरकार राजस्थान; श्री हरजोत सिंह बैंस, माननीय कैबिनेट मंत्री, तकनीकी शिक्षा एवं औद्योगिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा तथा भाषा एवं स्कूली शिक्षा, पंजाब सरकार; श्री अमन अरोड़ा, माननीय कैबिनेट मंत्री, रोज़गार सृजन, कौशल विकास एवं प्रशिक्षण, पंजाब सरकार; और श्री राजेश धर्माणी, माननीय कैबिनेट मंत्री, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण, हिमाचल प्रदेश सरकार शामिल हुए।

इस मंच के माध्यम से देश के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र को और मज़बूत करने, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण मानकों को बढ़ावा देने और प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीकों को शामिल करने पर गहन विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में ‘राष्ट्रीय आईटीआई उन्नयन एवं राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र योजना’ पर विस्तार से चर्चा की गई। इस योजना के तहत, देश भर में अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित राष्ट्रीय कौशल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जाएँगे। ये केंद्र न केवल उन्नत प्रशिक्षण प्रदान करेंगे, बल्कि उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास को भी बढ़ावा देंगे। सम्मेलन में आयोजित तकनीकी सत्रों में, डिजिटल लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म, कौशल मानकीकरण और उद्योग 4.0 के अनुरूप प्रशिक्षण रणनीतियों जैसे विषयों पर भी विशेष चर्चा हुई।

सम्मेलन का मुख्य फोकस हाल ही में स्वीकृत ₹60,000 करोड़ की राष्ट्रीय आईटीआई उन्नयन योजना और उत्कृष्टता केंद्र स्थापना योजना, जिसके अंतर्गत 1,000 सरकारी आईटीआई को हब-एंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से विश्वस्तरीय संस्थानों में परिवर्तित किया जाएगा। यह परिवर्तन उद्योग-आधारित विशेष प्रयोजन वाहनों (एसपीवी) द्वारा संचालित किया जाएगा। इस योजना के साथ-साथ, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 (पीएमकेवीवाई 4.0), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) और जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) जैसे प्रमुख कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई।